स्वरूप, यंग प्रोफेशनल
आईसीएआर- केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान
क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, भरूच (गुजरात)
शैलेष, शस्य विज्ञान विभाग,
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय,रायपुर
कशिश प्रीत कौर
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय,रायपुर
डॉ. बिस्वेश्वर गोरैन, वैज्ञानिक (मृदा विज्ञान),
डॉ. डेविड कैमस डी.,वैज्ञानिक (एग्रोफॉरेस्ट्री),
आईसीएआर- केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान
क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, भरूच (गुजरात)
परिचय
मृदा परीक्षण वह प्रक्रिया है जिसमें मिट्टी के नमूने का विश्लेषण करके उसमें मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा, अम्लता-क्षारीयता, लवणता तथा अन्य रासायनिक गुणों का पता लगाया जाता है। इससे मिट्टी की उर्वरता, पोषक तत्वों की कमी या अधिकता से होने वाली समस्याएँ तथा फसल उत्पादन क्षमता का आकलन किया जाता है।
मृदा परीक्षण के मुख्य उद्देश्य हैं—मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की मात्रा निर्धारण, उर्वरता की स्थिति जानना, उर्वरता मानचित्र तैयार करना, उर्वरक एवं मृदा संशोधन की उचित अनुशंसा देना तथा किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराना।
भारत में मृदा परीक्षण सेवा की शुरुआत वर्ष 1955-56 में भारत-अमेरिका समझौते के अंतर्गत 16 प्रयोगशालाओं से हुई थी। केन्द्र सरकार और Press Information Bureau (PIB) की रिपोर्टों के अनुसार, आज देश में लगभग 8272 जिला एवं क्षेत्रीय स्तर की मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएँ एवं मोबाइल लैब कार्यरत हैं। ये प्रयोगशालाएँ मृदा के भौतिक, रासायनिक और जैविक गुणों की जाँच कर किसान को सही उर्वरक प्रबंधन की सलाह देती हैं। इसके अतिरिक्त, मृदा परीक्षण भारी धातुओं जैसी प्रदूषण समस्याओं की पहचान में भी सहायक है।
मृदा परीक्षण की आवश्यकता
मृदा परीक्षण एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से मिट्टी की पोषक तत्वों की स्थिति, उर्वरता स्तर और भौतिक–रासायनिक गुणों का समग्र मूल्यांकन किया जाता है। यह परीक्षण फसल प्रबंधन, सही उर्वरक चयन और भूमि सुधार के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है, जिससे भूमि की उत्पादन क्षमता में वृद्धि और कृषि लागत में उल्लेखनीय कमी संभव होती है।
मृदा परीक्षण से हमें मृदा के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों की जानकारी प्राप्त होती है, जो निम्नलिखित हैं–
1. मृदा के भौतिक गुण:
मृदा बनावट (Soil Texture),मृदा संरचना (Soil Structure),थोक घनत्व (Bulk Density), रन्ध्रता (Porosity),जल धारण क्षमता (Water Holding Capacity),संतृप्ति एवं प्रवेश दर (Infiltration Rate)
2. मृदा के रासायनिक गुण:
- pH – मृदा की अम्लीयता या क्षारीयता
- विद्युत चालकता (EC) – लवणता का स्तर
- जैविक कार्बन (Organic Carbon) – मिट्टी की उर्वरता का प्रमुख संकेतक
- प्रमुख पोषक तत्व (Macronutrients): नाइट्रोजन (N) फॉस्फोरस (P) पोटाश (K)
- सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients): जस्ता (Zn), लोहा (Fe), तांबा (Cu), मैंगनीज (Mn), बोरॉन (B), मोलिब्डेनम (Mo), क्लोरीन(Cl), निकल (Ni)
- मृदा में उपस्थित धनायन की स्थिति: सोडियम (Na⁺), पोटेशियम (K⁺), कैल्शियम (Ca²⁺), मैग्नीशियम (Mg²⁺)
- मृदा में उपस्थित ऋणायन की स्थिति: कार्बोनेट (CO₃²⁻), बाइकार्बोनेट (HCO₃⁻), क्लोराइड (Cl⁻), सल्फेट (SO₄²⁻)
- मृदा की CEC (कैटायन विनिमय क्षमता)
3. मृदा के जैविक गुण
1. MBC – Microbial Biomass Carbon (सूक्ष्मजीवी जैव–भार कार्बन): मृदा में जीवित सूक्ष्मजीवों के शरीर में उपस्थित कार्बन की मात्रा
2. MBN – Microbial Biomass Nitrogen (सूक्ष्मजीवी जैव–भार नाइट्रोजन): जीवित सूक्ष्मजीवों के शरीर में उपलब्ध नाइट्रोजन की मात्रा।
3. Enzymatic Activity (एंजाइम गतिविधि): मृदा में सूक्ष्मजीवों द्वारा उत्पन्न एंजाइमों की सक्रियता, जो पोषक तत्वों के अपघटन का सूचक है।
(इन्हीं परिणामों के आधार पर किसान को उर्वरक की वैज्ञानिक मात्रा सुझाई जाती है।)
खेत से मृदा का नमूना एकत्र करने के उपकरण
मृदा परीक्षण हेतु खेत से मिट्टी का नमूना एकत्र करने के लिए विभिन्न प्रकार के उपकरणों का उपयोग किया जाता है। चित्र–1 में ऐसे प्रमुख उपकरण दर्शाए गए हैं। नमूना संग्रहण के लिए सामान्यतः प्रयोग किए जाने वाले उपकरण इस प्रकार हैं—
कुदाल/खुरपी, बरमा (औगर), पॉलीथीन, बाल्टी, स्केल/पेन, मोटे कागज़ की शीट, पॉलीथीन शीट तथा नमूना एकत्र करने के लिए थैला आदि।
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चित्र–1 मृदा का नमूना एकत्र करने के उपकरण |
नमूना संग्रहण की सही विधि
मृदा परीक्षण में सबसे महत्वपूर्ण चरण सही नमूना एकत्र करना है। गलत नमूने से गलत रिपोर्ट और गलत उर्वरक सिफ़ारिश मिलती है।
नमूना संग्रहण की प्रक्रिया—
- खेत के 8–10 स्थानों से ‘ज़िग-ज़ैग’ तरीके से नमूना लें।
- 0––30 सेमी गहराई तक मिट्टी निकालें। (चित्र 3.)
- पत्थर, खरपतवार, जीवांश आदि हटाकर साफ मिट्टी इकट्ठा करें।
- सभी नमूनों को मिलाकर लगभग 500 ग्राम मिश्रित नमूना तैयार करें।
- नमूने को साफ थैली/पौलीबैग में भरकर लेबल लगाएँ—
- किसान/खेत का नाम
- फसल का नाम
- नमूना लेने की तिथि
- खेत का GPS/स्थान विवरण
चित्र 2. नमूना एकत्र करने की विधियाँ (अ) नेटवर्क (ब) वक्र योजना (स) तिरछे में (द) स्थायी फसलें या खड़ी फसलें
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| 15-30 सेंमी. |
चित्र 3. खेत से 'वी’ आकार में नमूना निकालें
उर्वरक सिफारिश एवं उपयोग के लाभ
मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर निर्धारित उर्वरक मात्रा के अनेक लाभ हैं—
- उर्वरक लागत में बचत
- फसल उत्पादन में वृद्धि
- सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से होने वाले नुकसान में कमी
- मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता का संरक्षण
- संतुलित पोषण के कारण फसल की गुणवत्ता में सुधार
मृदा परीक्षण का सही समय
- फसल बोने से 1–1.5 माह पहले
- खेत में किसी भी प्रकार का उर्वरक डालने से पहले
- खरीफ/रबी सीजन के बीच अंतराल में
नमूना लेते समय सावधानियाँ
नमूना खेत का सच्चा प्रतिनिधि होना चाहिए। रंग, ढलान, उपजाऊ क्षमता की दृष्टि से भिन्न लगने वाले भागों से अलग-अलग नमूने लें। प्रयोग में लाये जाने वाले औजार, थैलियाँ, आदि बिल्कुल साफ होनी चाहिए। नमूनों को खाद, उर्वरक, दवाइयों, आदि के सम्पर्क में न आने दें। नमूना लेते समय सतह पर पड़ा हुआ कूड़ा, खरपतवार, गोबर, आदि पहले ही हटा दें। सिंचाई नहर (Irrigation Canal) के समीप से भी नमूना नहीं लिया जाना चाहिए; नहर से उचित दूरी बनाकर ही नमूना लेना चाहिए। पेड़ों के नीचे, खाद के गड्ढों के आस-पास तथा खेत की मेड़ों से लगभग 2 मीटर दूरी तक नमूने न लें।
निष्कर्ष
सतत एवं लाभदायक खेती के लिए मृदा परीक्षण आज की सबसे आवश्यक तकनीक है। यह किसानों को उनकी मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की वास्तविक जानकारी देता है, जिसके आधार पर संतुलित उर्वरक योजना बनाकर अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
सरकार भी किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध करा रही है ताकि हर किसान अपनी मिट्टी को समझकर वैज्ञानिक तरीके से खेती कर सके।
अतः प्रत्येक किसान को वर्ष में कम से कम एक बार मृदा परीक्षण अवश्य कराना चाहिए ताकि उच्च उत्पादन, कम लागत और स्वस्थ मिट्टी सुनिश्चित हो सके।
संदर्भ
1. ICAR–CSSRI आधिकारिक वेबसाइट
स्रोत: cssri.res.in
विवरण: विभाग (मृदा एवं फसल प्रबंधन), तथा क्षेत्रीय केंद्रों की जानकारी।
2. मृदा, जल एवं पादप विश्लेषण पुस्तिका – 2020
प्रकाशक: ICAR–Central Soil Salinity Research Institute (CSSRI), करनाल
शीर्षक: Soil, Water & Plant Analysis Manual – 2020
3. CSSRI कृषि किरण– 2021–2022
प्रकाशक: ICAR–CSSRI
विवरण: लवण–प्रभावित क्षेत्रों हेतु कृषि संबंधी तकनीकों एवं शोध का वार्षिक संकलन।




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