डॉ. आशीष कुमार केरकेट्टा, सहायक प्राध्यापक कृषि महाविद्यालय कोरबा
कीप्पु किरण सिंह महिलांग, सहायक प्राध्यापक कृषि महाविद्यालय मर्रा
डॉ. गौरव कांत निगम, विषय वास्तु विशेषज्ञ कृ वि के बलरामपुर
डॉ. पियूष प्रधान, सहायक प्राध्यापक कृषि महाविद्यालय कुरुद

फसल अवशेष
फसल उत्पादन (अनाज/फली/कन्द ) आदि को निकाल लेने के बाद बचे

फसल/पौधे के हिस्से फसल अवशेष होता है।

उदाहरणः- धान - अनाज - पैरा, भूसा

अरहर - दाल - डंठल, पत्ती

सरसों - दाना - डंढल, खली

आलू - आलू कंद - डंढल, पत्ती

प्याज - कन्द - डंढल, छिलका

गन्ना - गन्ना - पत्ती, रेशा

मक्का - दाना - डंढल,पत्ती,कोब

फसल कटाई और मिंजाई के बाद बचे फसल के भाग फसल अवशेष होता है।

फसल अवशेष दो तरीके से उपयोग में लाया जा सकता है

1. In Situ - जहां फसल उत्पादन हुआ उसी प्रक्षेत्र में

2. Ex Situ - फसल उत्पादन प्रक्षेत्र से अलग स्थान पर

प्रक्षेत्र में { In Situ}

1. जला देना - नाइट्रोजनआक्साइड, Co2, CH4,O3

2. मिट्टी में मिला देना- सूक्ष्म जीव, उर्वरता हासो नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार के आंकड़े के अनुसार प्रतिवर्ष औसतन 500 मिलियन (5 अरब) टन फसल अवशेष उत्पादन होता है।

प्रक्षेत्र के बाहर { Ex Situ}

1. ऊर्जा उत्पादन के लिए - बायो गैस, बायो इथनाॅल गैसीफिकेशन, पयरोलिसिस

2. गैर ऊर्जा उत्पादन - कंपोस्ट खाद, मशरुम उत्पादन, मल्चिंग, ईठ भट्ठा, पल्प (गुदा)/लुग्दी MDF Medium Density Fibreboard पशु आहार, पल्प -से पेपर

विकल्प है:- 1. जागरुकता बढ़ाना

2. किफायती मशीनें उपलब्ध कराना

3. फसल अवशेष विक्रय हेतु नये अवसर प्रदान करना

फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपलब्ध मशीन

मिट्टी में मिलाने के लिए - 1. डिस्क प्लाऊ (तवादार हल) 2. मल्चर, 3. रोटरी टिलर (रोटो वेटर)

सीधी बीज बुवाई के लिए - 1. जीरो टिल ड्रील 2. हैप्पी सीडर 3. सुपर सीडर

अवशेष इकत्र करने के लिए - 1. हे रेक - हार्वेस्टर द्वारा छोड़े अवशेष को इकत्र करना

2. बेलर - गटठा बनाना 3. स्ट्रा चाॅपर/स्ट्रा रीपर

उन्नत कृषि उपकरणों के क्रय हेतु योजना या अनुदान राशि
कृषक बंधु कोई भी कृषि यंत्र यदि शासकीय योजनाओं के माध्यम से खरीदते हैं तो लगभग 30-35ः अनुदान राशि प्राप्त होती है।बीज निगम या चैम्पस के माध्यम से ले सकते है।

छ.ग. शासन के संभागीय कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

1. कार्यालय कृषि यंत्री बिलासपुर

2. कार्यालय कृषि यंत्री रायपुर

3. कार्यालय कृषि यंत्री जगदलपुर

तवादार हल - यह घास,फूल,फसल अवशेष वाले खेतों में जुताई हेतु अपयुक्त यंत्र है। यह टैªक्टर चलित होता है। दो या तीन तवा होता है तवा गोल घूमते हुए खरपतवार, घास या पैरा को काटते हुए आगे बढ़ता है और मिट्टी काटकर इस प्रकार फसल अवशेष को दबा देता है।

मल्चर - मल्चर, रोटरी पिलिंग के सिद्धांत पर कार्य करता है। यह ट्रैक्टर चलित PTO आधारित यंत्र है।

खरपतवार या फसल अवशेष को बारीक काटकर खेत के उपर एक परत बना देता है।

रोटरी टिलर और मल्चर में अंतर - रोटरी टिलर (रोटावेटर) फसल अवशेष को काटकर मिट्टी के साथ मिला देता है। जबकि मल्चर सिर्फ खरपतवार या फसल अवशेष को बारीक काटके मिट्टी को बिना जुताई किये/हुए फसल अवशेष का बेड/शय्या या बिछावना बना देता है।

जीरो टिल ड्रील- यह मशीन खेत की बिना जुताई किये बीज को कतार में बुवाई करता है जिससे जुताई का खर्च बच जाता है।

हैप्पी सीडर - फसल अवशेष को जलाने की समस्या से बचाव के रुप में इसका उपयोग किया जाता है।

इसमे कंबाइन द्वारा छोडे गये पैरा को उपर काटकर, बीज बुवाई किया जाता है साथ ही कटे पैरा को बीज के उपर बिछावना की तरह बिछा देता है जिससे मिट्टी की नमी खेत में संरक्षित रहे और बिना सिंचाई के अंकुरण हो सके।

फसल अवशेष प्रबंधन राष्ट्रीय नीति NPMCR (National Policy on Management of Crop Residues)कृषि मंत्रालय भारत सरकार

1. अवशेषो को मिट्टी में मिलाना

2. पदार्थो की पैंकिग में फसल अवशेष का उपयोग

3. चार कोल गैसीकरण

4. जैव इथेनाल उत्पादन

5. बायोमास आधारित पावर प्लांट NTPC

6. कागज और गत्ता उद्योग

7. मशरुम उत्पादन

8. जैविक खाद बनाना

9. चारा बैंक का निर्माण - गौठान के लिए चारा व्यवस्था

10. फसल क्रम में विविधिकरण

11. मशीनरी के लिए बैंक से ऋण

12. कस्टम हायरिंग सेंटर का निर्माण

13. जैव अवशेष प्रबंधन प्रौद्योगिकी

14. फसल अवशेष जलाने के खिलाफ उचित कानून और क्रियान्वयन