तरुण कुमार, समीर ताम्रकार एवं विजय कुमार
पुष्प विज्ञान एवं भू दृश्य वास्तुकला विभाग कृषि महाविद्यालय,
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर (छ. ग.)

गेंदा ऐस्टरेसी कुल का एक सर्वाधिक नियमित रूप से लगाया जाने वाला फूलदार पौधा है। भारत में गेंदा सबसे लोकप्रिय खुले फूल है। इसे सजावटी फसल, गमले के पौधे के रूप में और भूदृश्य के हिस्से के रूप में लगाया जाता है। हाल के वर्षों में, गेंदा खुले फूल के रूप में लोकप्रिय हो गया है। छत्तीसगढ़ राज्य के व्यक्तिगत उत्पादकों के बीच सजावटी मूल्य के साथ-साथ बीज उद्देश्य के लिए गेंदा की खेती का महत्व बढ़ रहा है। गेंदा एक लोकप्रिय फूल फसल है जो दुनिया भर में व्यावसायिक पैमाने पर उगाई जाती है। खुले फूलों के अलावा, फूलों से निकाले गए कैरोटीनॉइड्स का उपयोग औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। इसका व्यावसायिक रूप से दवाइयाँ, खाद्य पूरक, पशु आहार योजक और खाद्य एवं सौंदर्य प्रसाधनों में रंगद्रव्य के रूप में उपयोग किया जा रहा है। गेंदा की सामान्य रूप से उगाई जाने वाली प्रजातियां अफ्रीकी गेंदा और फ्रेंच गेंदा हैं। कुछ उत्पादक फ्रेंच प्रकार या अफ्रीकी प्रकार के गेंदा के फूलों को गमले के पौधों के रूप में बेचते हैं।

छत्तीसगढ़ में गेंदा खुले फूलों में प्रथम स्थान पर है और गणेश चतुर्थी, दशहरा, दिवाली, शादियों आदि जैसे विशेष अवसरों पर इसकी मांग कई गुना बढ़ जाती है। फूलों का व्यापक रूप से मालाओं की तैयारी में और धार्मिक समारोहों, उत्सवों आदि के अवसरों पर खुले फूल के रूप में उपयोग किया जाता है। छत्तीसगढ़ का पुष्पकृषि क्षेत्र 12973 हेक्टेयर में फैला हुआ है, जिससे कुल 1,72,629 मेट्रिक टन उत्पादन होता है। गेंदा इस उत्पादन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी खेती 5486 हेक्टेयर में की जाती है और 57010 मेट्रिक टन का योगदान है, जो राज्य में किसी एक फूल प्रजाति के लिए सबसे अधिक क्षेत्रफल का प्रतिनिधित्व करता है। गेंदा की खेती में, महासमुंद जिला क्षेत्रफल के हिसाब से अग्रणी है, जिसमें 663 हेक्टेयर शामिल हैं, जबकि सरगुजा जिला सबसे अधिक उत्पादकता दर्शाता है, जो 12322 मेट्रिक टन दर्ज करता है। (स्रोत -बागवानी और कृषि वानिकी, नवा रायपुर, छत्तीसगढ़)

गेंदा में पिनचिंग (शीर्ष कर्तन)
पिनचिंग एक सरल लेकिन प्रभावी तकनीक है जो गेंदे के पौधों की वृद्धि और विकास को बेहतर बनाने में मदद करती है। यह तकनीक छोटे किसानों के लिए भी उपयोगी है क्योंकि इसके लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती है। पिनचिंग द्वारा पौधे के शीर्षस्थ कली को हटाने से पार्श्व शाखाओं का विकास होता है, जिससे फूलों की संख्या बढ़ती है। यह तकनीक पौधे को अधिक घना और सुंदर बनाती है तथा फूलों की गुणवत्ता में सुधार करती है। इसके अलावा, पिनचिंग से पौधे को छोटा आकर दे सकते है, जो विशेषकर गमले में उगाए जाने वाले पौधों के लिए उपयुक्त होते है।

पिंचिंग का कार्य सिद्धांत
मुख्य तना (अग्र प्ररोह) पार्श्व शाखाओं की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ता है, जिसे अग्र प्रभाविता कहा जाता है। पिनचिंग (शीर्ष कर्तन) में पौधे के शीर्षस्थ कली (अग्र प्ररोह) को हटा दिया जाता है, जिससे अग्र प्रभाविता का विघटन होता है। अग्र प्ररोह को हटाने से पौधे की ऊर्जा पार्श्व शाखाओं के विकास की ओर निर्देशित होती है। इससे पौधा अधिक घना और झाड़ीदार हो जाता है। अधिक शाखाओं के विकास से फूलों की संख्या में वृद्धि होती है, जिससे फूलों का उत्पादन बढ़ता है।

पिनचिंग (शीर्ष कर्तन) तकनीक

विधि
पौधे के शीर्षस्थ कली को अंगुलियों से या छोटे कैंची की मदद से सावधानीपूर्वक हटा दें द्य यदि आप कैंची का उपयोग करते हैं, तो कैंची को एल्कोहल से संक्रमण मुक्त कर लेवें । पौधे के शीर्षस्थ कली को छोटे कैंची की मदद से सावधानीपूर्वक हटाना ।

गेंदे के पौधों में पिनचिंग का सही समय जब पौधे में 4-6 पत्तियां निकल आएं, तब होता है। रोपण के 30-40 दिन बाद आमतौर पर पिनचिंग की जाती है, इस समय पौधा वानस्पति वृद्धि में सक्रिय होता है और पिनचिंग करने से पौधे में नई शाखाएं निकलने लगती हैं। इस अवस्था के बाद की गई पिनचिंग शाखाओं के विकास के लिए कम प्रभावी साबित होती है।

पिनचिंग का सही समय - रोपण के 30-40 दिन बाद

पिनचिंग के लाभों का विस्तारित विवरण
पिनचिंग एक ऐसी तकनीक है जो न केवल फूलों की संख्या बढ़ाती है बल्कि पौधे की समग्र गुणवत्ता में भी सुधार करती है।

1. अधिक प्रचुर मात्रा में फूल - पिनचिंग से पार्श्व शाखाओं का विकास होता है, जिससे फूलों की कलियों की संख्या बढ़ जाती है। पिनचिंग के कारण पौधे लंबे समय तक फूलते रहते हैं। कुछ किस्मों में, पिनचिंग से फूलों का आकार भी बढ़ सकता है।

चित्र क्रमांक 1

2. सुंदर और संतुलित आकार - पिनचिंग से पौधे का आकार घना और झाड़ीदार हो जाता है। पिनचिंग से पौधा अधिक आकर्षक और सुंदर दिखाई देता है। पौधे की वृद्धि को संतुलित करती है, जिससे यह अधिक सुडौल दिखता है। पिचिंग प्रक्रिया के परिणाम स्वरूप पौधे की ऊंचाई 25 प्रतिशत तक कम हो जाती है।

 चित्र क्रमांक 2

3. गुणवत्ता में सुधार - पिनचिंग से फूलों की गुणवत्ता में सुधार होता है। फूल अधिक बड़े, चमकीले और लंबे समय तक टिकने वाले होते हैं। पिनचिंग से पौधे की जड़ें मजबूत होती हैं और यह रोगों और कीटों के प्रति अधिक प्रतिरोधी बन जाता है।

 चित्र क्रमांक 3

4. पौधे का आकार नियंत्रण - पिनचिंग से पौधे की ऊंचाई को नियंत्रित किया जा सकता है। यह विशेष रूप से गमलों में उगाए जाने वाले पौधों के लिए उपयोगी होता है। पिनचिंग से पौधे को वांछित आकार दिया जा सकता है, जैसे कि गोल या चैड़ा।
चित्र क्रमांक 4

5. पिनचिंग से पौधे लंबे समय तक फूलते रहते है
चित्र क्रमांक 5

नोट- इं. गा. कृ. वि. रायपुर में पुष्प विभाग द्वारा अनुसंधान प्रयोगों से पिनचिंग तकनीक से गेंदा के उत्पादन में वृद्धि का प्रभाव चित्रानुसार, चित्र क्रमांक 1 और 2 में पिनचिंग के बाद वानस्पतिक विकास, चित्र क्रमांक 3 में पौधो की शाखा की संख्या में वृद्धि, चित्र क्रमांक 4 और 5 में पिनचिंग के बाद कलियों और फूलो की संख्या में वृद्धि।

निष्कर्ष
गेंदा एक महत्वपूर्ण फूलदार फसल है, जो अपनी सुंदरता और सांस्कृतिक महत्व के कारण छत्तीसगढ़ में व्यापक रूप से उगाया जाता है। पिनचिंग एक सरल और प्रभावी तकनीक है, जो गेंदे की खेती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अध्ययनों से यह निष्कर्ष निकाला गया है की गेंदा में 30 से 40 दिन बाद पिचिंग करने से 15 से 20 प्रतिशत तक पुष्पों की उपज में वृद्धि प्राप्त की जा सकती है तथा कम लागत में अधिक आमदनी प्राप्त की जा सकती है।