संदीप तांडव (पीएचडी) वानिकी विभाग
डॉ. ज्योति सिन्हा (पीएचडी) वानिकी विभाग
डॉ. प्रताप टोप्पो (सहायक प्राध्यापक) वानिकी विभाग 
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर (छ.ग.)

इंसुलिन प्लांट अर्थात कोस्टस पिक्टस (Costus pictus) जड़ी-बूटी में इस्तेमाल होने वाला पौधा है जिसे स्पाइरल फ्लैग (spiral flag) के नाम से जाना जाता है। यह एक बारहमासी सदाबहार पौधा है जो शुगर के मरीजों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। भारत में कोस्टस पिक्टस को इन्सुलिन का पौधा भी कहा जाता है, क्योंकि इसके सेवन से शरीर में शुगर या ग्लूकोज की मात्रा नियंत्रित होती है। यह पौधा दिखने में बेहद आकर्षक होता है क्योंकि, इसके पत्ते स्पाइरल (Spiral) रूप में इसकी शाखाओं पर लिपटे होते हैं। इन्सुलिन के पौधे को बहुत से लोग सजावटी पौधे के रूप में भी अपने घरों में लगाते हैं।

कोस्टस पिकटस (इंसुलिन) का पौधा डायबिटीज के लिए रामबाण है। इसकी पत्ती का स्वाद खट्टा होता है और कंद का आकार अदरक की तरह होता है। इसके कंद का सूप बनाकर पीने से कई बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है। इस पौधे की ताजा पत्ती चबाने से ब्लड में ग्लूकोज लेवल नियंत्रित करने में मदद मिलती है। यह पौधा ‘जिंजर फैमिली’ से संबंध रखता है इसलिए आप इसे राइजोम (प्रकंद) और कटिंग से लगा सकते हैं।

इन्सुलिन का पौधा लगाने का मौसम –
बारिश का मौसम किसी भी पौधे को लगाने का उत्तम समय है। इन्सुलिन के पौधे को आप आसानी से लगा सकते हैं। बस आपको इसके लगाने के सही समय के बारे में पता होना चाहिए। आपको बता दें कि, इंसुलिन प्लांट को लगाने का सबसे अच्छा समय बारिश का मौसम होता है क्योंकि, बारिश के मौसम में यह पौधा तेजी से ग्रो करता है।

इंसुलिन प्लांट लगाने के लिए आप नर्सरी से पौधे ला सकते हैं या पौधे की कटिंग से भी इसे लगा सकते हैं।

उचित मृदा–
  • आप कोस्टस पिक्टस (इन्सुलिन) के पौधे लगाने के लिए कन्हार मृदा का उपयोग कर सकते हैं।
  • पौधों के विकास के लिए अतिरिक्त जल निकासी वाली मिट्टी का चयन करें।
  • गीली या चिपचिपी मिट्टी में पौधे न लगाएं।

इंसुलिन के पौधे को पानी देना –
  • मिट्टी में पानी भराव से बचें, क्योंकि इससे आपके पौधे की जड़ें सड़ सकती हैं और पौधा नष्ट हो सकता है। पौधे की वृद्धि के दौरान नियमित रूप से पानी दें।
  • मिट्टी में उचित मात्रा में नमी बनाए रखें।
  • सर्दी के मौसम में बहुत अधिक पानी देने से बचें।

इंसुलिन के पौधों के विकास के लिए धूप –
  • कोस्टस पिक्टस (इन्सुलिन) का पौधा पूर्ण धूप और आंशिक छाया में अच्छी तरह से ग्रो करता है।
  • इन्सुलिन के पौधे को रोजाना 5 से 6 घंटे की धूप प्राप्त होनी चाहिए।
  • आप पौधे को ऐसे स्थान पर लगाएं, जहां इन्हें उचित मात्रा में धूप मिल सके।

इंसुलिन के पौधे की वृद्धि के लिए तापमान –
कोस्टस पिक्टस (इन्सुलिन) का पौधा 30-45°C के बीच वाले तापमान में अच्छी तरह से विकसित होता है।

इन्सुलिन का पौधा ग्रो करने के लिए उर्वरक –
कोस्टस पिक्टस (इन्सुलिन) के पौधे उगाने के लिए जैविक उर्वरक सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इंसुलिन प्लांट के लिए फास्फोरस और पोटेशियम से युक्त खाद उपयुक्त होती है। इस पर कम नाइट्रोजन वाले उर्वरक का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि, बहुत अधिक नाइट्रोजन पौधों में अत्यधिक पत्ते उगाने का कारण बनती है और पैदावार भी कम होती है। इन्सुलिन के लिए आवश्यक उर्वरक निम्न है:
  • बोनमील
  • रॉक फास्फेट
  • मस्टर्ड केक
  • नीम केक

इसके साथ-साथ आप पुरानी गोबर की खाद का उपयोग भी कर सकते हैं।

इंसुलिन के पौधों की कीटों से सुरक्षा –
इन्सुलिन के पौधों को कीटों और रोगों से बचाने के लिए आप पौधों पर नीम तेल का छिड़काव कर सकते हैं।

इंसुलिन प्लांट के औषधीय गुण–
  • कोस्टस पिक्टस (इन्सुलिन) के पौधे का सबसे बड़ा फायदा शुगर (Sugar) के मरीजों के लिए होता है। बता दें कि, जिन लोगो को शुगर (Sugar) की प्रॉब्लम होती है वे लोग इस पौधे की पत्ती चबाकर चूंसे तो इससे उनकी समस्या कम हो जाती है। इन्सुलिन के पौधे की रोज एक पत्ती चबाकर खाने से खून में ग्लूकोज का लेवल कम होता है। इसके अलावा आप इस पौधे के पत्तियों का सूखा चूर्ण ½-1 ग्राम दिन में दो बार ले सकते हैं।
  • इंसुलिन के पत्‍ते को चबाने से शरीर के मेटाबालिक प्रोसेस बेहतर होता है। इस पौधे (Insulin Plant) में मौजूद प्राकृतिक रसायन इंसान के शरीर की शुगर (Controls Blood Sugar) को ग्लाइकोजेन में बदल देता है जिससे मधुमेह पीड़ितों को फायदा होता है. सिर्फ शुगर ही नहीं, खांसी, जुकाम, स्किन इंफेक्शन, आंखों का इंफेक्शन, फेफड़ों की बीमारियां, दमा, दस्त, कब्ज आदि बीमारियों में भी इंसुलिन के पौधे का इस्तेमाल किया जाता है।

इन तत्वों से भरपूर है इंसुलिन पौधा
बता दें कि इंसुलिन पौधों को क्रेप अदरक, केमुक, कुमुल, कीकंद, पकरमुला, पुष्करमूला जैसे नामों से भी जाना जाता है। इंसुलिन पौधे में प्रोटीन, टेनिन्स, सेपोनिन, स्टेरॉयड फ्लेवोनॉयड्स, एस्कॉर्बिक एसिड, आयरन, बी कैरोटीन न्यूट्रिएंट्स अल्केलॉयड्स एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसके सेवन से हाई ब्लड शुगर को मिनटों में कंट्रोल किया जा सकता है। इस पौधे में मौजूद प्राकृतिक रसायन शुगर को ग्लाइकोजन में बदल देता है।

इंसुलिन पौधे की पत्तियां शुगर लेवल घटाए
इंसुलिन पौधे की पत्तियां ढेरों परेशानियों से लड़ने की क्षमता रखती हैं। खासतौर पर शुगर कंट्रोल करने में यदि आप डायबिटीज से पीड़ित हैं तो इंसुलिन के पौधे की पत्तियां चबाना चाहिए, ऐसा करने से शुगर लेवल कंट्रोल होता है। दरअसल, इस पौधे में मौजूद प्राकृतिक रसायन इंसान के शरीर की शुगर को ग्लाइकोजेन में बदल देता है, जिससे मधुमेह पीड़ितों को लाभ होता है।

इंसुलिन पौधा मेटाबालिक प्रोसेस ठीक करे
कोक्टस पिक्टस (इंसुलिन पौधे) के पत्ते अधिक बीमारियों में कारगर है। इसकी पत्तियों को चबाने से शरीर के मेटाबालिक प्रोसेस बेहतर होता है, ऐसे में इसके पत्तों को नियमित चबाने की सलाह दी जाती है।

इंसुलिन की पत्तियां कैसे करें इस्‍तेमाल
इंसुलिन के पौधे का लाभ लेने के लिए सबसे पहले इसकी दो पत्तियों को लेकर अच्छे से धोकर पीस लें। इसके बाद एक गिलास पानी में इसे घोलकर सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करें। इसके नियमित सेवन से डाइबिटीज की बीमारी में सुधार दिखने लगता है। साथ ही कई और गंभीर बीमारियों में भी सुधार होता है।

इंसुलिन के पौधे के अन्‍य फायदे
  • खांसी-जुकाम से राहत दिलाए
  • स्किन-आंखों के इंफेक्शन को रोके
  • फेफड़ों की बीमारियों से बचाए
  • गर्भाशय संकुचन में असरदार
  • दमा, दस्त, कब्ज ठीक करे
  • कोलेस्ट्रॉल कम करने में उपयोगी
  • कफ कोल्ड और अस्थमा में राहत दिलाए
  • यूटरिन इंफेक्शन में फायदेमंद
  • दमा-गठिया को ठीक करे!