सुषमा वर्मा , किरण नेताम, डॉ. प्रदीप कुमार तिवारी, पादप रोग विज्ञान विभाग,
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविधालय, रायपुर (छ. ग.)
परिचय - गुलाब (Rosa spp.) एक बहुवर्षीय, कांटेदार, पुष्पीय पौधा है जो विश्व का एक प्रमुख पुष्प है, जिसकी सुंदरता और सुगंध के कारण इसे "फूलों का राजा" कहा जाता है। छत्तीसगढ़ में गुलाब की खेती सीमित पैमाने पर रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, कोरबा, राजनांदगांव और महासमुंद जिलों में की जाती है। यहाँ इसे मुख्यतः सजावटी उद्यानों, विवाह समारोहों, और स्थानीय बाजारों की मांग को पूरा करने के लिए उगाया जाता है। खुले खेतों के साथ-साथ पालीहाउस में भी उच्च गुणवत्ता वाले कट-फ्लावर गुलाब का उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ रहा है। परंतु, इसके उत्पादन और गुणवत्ता पर अनेक रोगों का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इन रोगों के कारण न केवल पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है, बल्कि पुष्पों की बाज़ार में बिक्री योग्य गुणवत्ता भी घट जाती है। गुलाब को प्रभावित करने वाले प्रमुख रोगों में पाउडरी मिल्ड्यू, डाईबैक, रस्ट, ग्रे मोल्ड और ब्लैक स्पॉट शामिल हैं।
1. पाउडरी मिल्ड्यू (Powdery mildew) – Sphaerotheca pannosa var. rosae
लक्षण:
- पत्तियों, कलियों एवं कोमल शाखाओं पर सफेद आटे जैसी परत।
- पत्तियाँ मुड़कर सिकुड़ जाती हैं और समय से पहले गिर जाती हैं।
- फूलों की गुणवत्ता घट जाती है।
रोकथाम:
- रोगरोधी किस्मों का चयन।
- संक्रमित भागों की छँटाई एवं नष्ट करना।
- सल्फर डस्टिंग (250 g/100 m²) या घुलनशील सल्फर (0.3%) का छिड़काव।
- हेक्साकोनाज़ोल 0.1% या डाइनोकैप 0.05% का प्रयोग।
2. ब्लैक स्पॉट (Black spot) – Diplocarpon rosae
लक्षण:
- पत्तियों पर गोल काले धब्बे जिनके किनारे दाँतेदार।
- पत्तियाँ पीली होकर झड़ जाती हैं।
- पौधा कमजोर हो जाता है और फूल उत्पादन घटता है।
रोकथाम:
- गिरे हुए संक्रमित पत्तों को नष्ट करें।
- सिंचाई के समय पत्तियों को गीला न होने दें।
- प्रोपिकोनाज़ोल 0.1% या मैनकोज़ेब 0.25% का छिड़काव।
3. डाई बैक (Die-back) – Botryodiplodia theobromae, Colletotrichum spp.
लक्षण:
- शाखाओं के सिरे से सूखना शुरू होता है।
- सूखी टहनियों का रंग गहरा भूरा से काला।
- संक्रमण धीरे-धीरे नीचे की ओर फैलता है।
रोकथाम:
- संक्रमित शाखाओं की छँटाई करके 5–10 सेमी नीचे से काटें और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड पेस्ट लगाएँ।
- कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 0.3% या कार्बेन्डाजिम 0.1% का छिड़काव।
4. बॉट्रिटिस ब्लाइट / ग्रे मोल्ड (Botrytis blight) – Botrytis cinerea
लक्षण:
- फूलों पर भूरे पानी से भीगे धब्बे।
- धब्बों पर ग्रे रंग की फफूंदी।
- कलियाँ सड़ जाती हैं और नहीं खुलतीं।
रोकथाम:
- हवादार स्थान पर पौधों की रोपाई।
- प्रभावित कलियों और फूलों को हटाना।
- कैप्टन 0.2% या इप्रोडियोन 0.2% का छिड़काव।
5. जंग (Rust) – Phragmidium mucronatum
लक्षण:
- पत्तियों के निचले भाग पर नारंगी-भूरे रंग के बीजाणु पुंज।
- पत्तियों का पीला पड़ना और गिरना।
- पौधा कमजोर हो जाता है।
रोकथाम:
- रोगरोधी किस्में लगाएँ।
- संक्रमित पत्तियों को तोड़कर नष्ट करना।
- हेक्साकोनाज़ोल 0.1% या मैनकोज़ेब 0.25% का छिड़काव।


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