चन्द्रकला (कृषि अर्थशास्त्र विभाग)
डॉ. हरेन्द्रकुमार (सस्य विज्ञान विभाग)

कृषि कायों में लगातार यांत्रिक उपकरणो के उपयोग से खेती मे उर्जा की खपत बढती जा रही है फलस्वरूप कृृषि लागत भी वढ रही है। खेती में विभिन्न प्रकार के कृषि कार्यों के लिए विद्युत उर्जा का उपयोग होता है। उर्जा की बढती कीमत में भी खेती को लाभदायक बनाने के लिए सस्ती वैकल्पिक उर्जा श्रोत की आवश्यकता है जिसे आजकल सौर ऊर्जा के द्वारा पूरा किया जा रहा है।

सौर यंत्र एक ऐसा यंत्र है जो सूर्य की तेज किरणों को अवशोषित करके विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है जिससे विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्र चलाए जाते हैं। इससे न केवल विद्युत व विद्युत बिल की बचत होती है बल्कि यह किसानों के लिए भी बहुत सुरक्षित मानी जाती है साथ ही साथ पर्यावरण प्रदूषण को भी कम करती है।

आधुनिक समय में कृषि में इस तरह के नवीनीकरण ऊर्जा का प्रयोग बहुतायत में किया जाता है किसान अपने प्रक्षेत्र पर ही इस प्रकार के पैनल को लगाते हैं तथा सूर्य के तेज प्रकाश को सौर ऊर्जा मैं परिवर्तित कर कृषि कार्य में प्रयोग करते हैं। इस तरह विद्युत की बचत करने से किसानों की अपनी कुल आय में अतिरिक्त आय का इजाफा हो जाता है क्योंकि विद्युत में आने वाले बिल की बचत होती है।

आजकल सौर ऊर्जा से कृषि में सिंचाई प्रचलन बहुतायत में हो रहा है विशेष रुप से शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों में यह पद्धति बहुत ही विकसित हो रही है क्योंकि जब सूर्य का प्रकाश बहुत तेज होता है वहां पर बहुत अधिक गर्मी होने से सिंचाई की भी बहुत आवश्यकता होती है इसके लिए अधिक सौर ऊर्जा की भी खपत होती हैं

सौर ऊर्जा सिंचाई प्रणाली सौर ऊर्जा सिंचाई प्रणाली एक प्रकार की ऊर्जा प्रणाली है जिसमें सूर्य के प्रकार के ऊर्जा का उपयोग कृषि क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति करने के लिए किया जाता है। इस प्रणाली मेंसौर पैनल्स और बैटरी स्टोरेज का उपयोग किया जाता है ताकि दिन और रात के समय पानी की आपूर्ति की जा सके और किसानों को बिजली की आपूर्ति की आवश्यकता न हो।

बनावट-

सौर पैनल्स
सौर पैनल्स या फोटोवोल्टेक सेल्स सूर्य की किरणों को अवशोषित करते हैं और उन्हें बिजली में परिवर्तित करते हैं। ये पैनल्स खेतों में स्थापित किए जाते हैं ताकि वे सूर्य के प्रकार की ऊर्जा को बिजली में बदल सकें। सौर पैनल्स की स्थापना खेतों के ऊपर या खेतों के चारों ओर की जा सकती है। जब सूर्य की किरणें इन पैनल्स पर पड़ती हैं, तो वे बिजली उत्पन्न करती हैं जो सिंचाई प्रणाली को चलाने के लिए उपयोग होती है।

बैटरी स्टोरेज
सौर पैनल्स से उत्पन्न बिजली को संचित करने के लिए बैटरी स्टोरेज का उपयोग किया जाता है। यह बैटरी स्टोरेज रात के समय या जब सूर्य की किरणें नहीं होती हैं, तब बिजली को उधारित करने के लिए उपयोग होता है। इसके बिना, सिंचाई प्रणाली को सिर्फ दिन के समय ही चलाया जा सकता है, लेकिन बैटरी स्टोरेज के साथयह रात के समय भी काम कर सकती है।

सिंचाई पंप
सिंचाई प्रणाली को चलाने के लिए एक सिंचाई पंप का उपयोग किया जाता है। यह पंप पानी को खेतों में पहुंचाने के लिए उपयोग होता है। इस पंप को बिजली से चलाने के लिए सौर पैनल्स द्वारा उत्पन्न की जाने वाली बिजली का उपयोग किया जाता है। सिंचाई पंप की सहायता से किसान अपने खेतों को आवश्यकतानुसार सिंचा सकते हैं, जिससे पौधों को उनकी आवश्यकता के अनुसार पानी मिलता है और उनकी वृद्धि होती है।

सौर ऊर्जा सिंचाई प्रणाली के फायदे-
किसानों को बिजली बिल से मुक्ति सौर ऊर्जा सिंचाई प्रणाली के माध्यम से किसान बिजली के बिना ही सिंचाई कर सकते हैं, जिससे उन्हें बिजली बिल की चिंता से मुक्ति मिलती है।

पानी की बचत 
यह प्रणाली पानी की बचत करने में मदद करती है, क्योंकि यह पानी को व्यवस्थित और न्यूनतम खपत में प्रयुक्त करती है।

प्रदूषण कमी
सौर ऊर्जा सिंचाई प्रणाली का उपयोग करके वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है, क्योंकि इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले सौर पैनल्स से कोई भी वायु प्रदूषक नहीं निकलता है।सौर ऊर्जा सिंचाई प्रणाली एक उत्कृष्ट तरीका है जिससे किसानों को अधिक बिजली के बिल से मुक्ति मिलती है और सिंचाई प्रणाली को पानी की बचत करने में मदद मिलती है। यह एक प्राकृतिक और स्वच्छ प्रणाली है जो खेतों की सिंचाई को प्रभावी और साथ ही पर्यावरण के लिए भी अच्छी तरह से प्रबंधित करने में मदद करती है। इसके द्वारा, हम सुनहरा भविष्य बना सकते हैं जो हमारे खेतों के लिए और भी सुखद हो।सौर सिंचाई पद्धति कैसे कार्य करता है

सौर सिंचाई पद्धति कैसे कार्य करता है-
इसमें जो पंप पानी को उठाता है उसका संबंध सीधे सोलर सेल्स से कर दिया जाता है इस प्रकार सूर्य की तेज किरणें जब इस सेल्स पर पड़ती है तो यह उन किरणों से आने वाली ऊर्जा को अवशोषित करके विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित कर देती है जो विद्युत मोटर के संचालन मैं प्रयुक्त होती है जिससे मोटर चलने लगती है तथा पंप पानी को तेज गति से उठाता है। हालांकि सौर ऊर्जा का सिद्धांत लगभग डीजल इंजन या विद्युत पर आधारित ऊर्जा से ही है परंतु यह दोनों ही विधियां सौर ऊर्जा की अपेक्षा अधिक महंगी होती हैं तथा इनके हानि भी तुलनात्मक अधिक होते हैं।

इसके साथ-साथ यह भी देखा गया है कि विकासशील देशों में विद्युत ऊर्जा किसानों के लिए सदैव लाभदायक नहीं रहती है क्योंकि गांव में पावर ग्रिड लगाने से कभी कभी समय पर विद्युत के न आने से या अन्य तकनीकी खराबीयों से समय पर कृषि क्रियाएं बाधित होती हैं इसीलिए अब यह आवश्यक हो चला है कि किसान परंपरागत साधनों की अपेक्षा नवीनीकरण साधनों को अपनाएं।

सौर ऊर्जा पंप ही क्यों
हालांकि डीजल पंप सौर ऊर्जा पंप की अपेक्षा अधिक सक्षम होते हैं परंतु इसमें एक मुख्य बाधा तेल की उपलब्धता होती है जोकि पर्यावरण प्रदूषण के लिए भी उत्तरदाई होती है डीजल के द्वारा चलने वाले पंप बहुत सस्ते होते हैं लेकिन इनके संचालन में काफी खर्चा आ जाता है और दूसरी और आधुनिक समय में डीजल तेल के मूल्य में भी लगातार वृद्धि होने से यह काफी महंगी पद्धति साबित होती जा रही है वही सौर ऊर्जा पर आधारित पंप बहुत ही सुविधाजनक है हालांकि यह डीजल पंप की अपेक्षा अधिक महंगी पद्धति है लेकिन इसमें ऊर्जा बिल्कुल मुफ्त होती है तथा यह पर्यावरण के लिए भी बहुत अच्छी मानी जाती है और इसमें एक बार पैसा लगाने से यह लंबे समय तक कार्यशील भी रहती है अतः इन सभी कारणों को देखते हुए कहा जा सकता है कि सौर ऊर्जा पर आधारित सिंचाई पद्धति बहुत ही अच्छी मानी जाती है।