डॉ. हरेन्द्र कुमार (सस्य विज्ञान विभाग)
चन्द्रकला (कृषि अर्थशास्त्र विभाग)


क्या है नैनो यूरिया
हर साल खाद की फसल के सीजन में खाद की बढ़ती किल्लत और कालाबाजारी को देखते हुए इफको ने यूरिया का लिक्विड फॉर्म विकसित किया है। इसके निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने मई 2021 में गुजरात के कलोल में नैनो यूरिया के पहले प्लांट का उद्घाटन किया था। इसकी कुल लागत 175 करोड़ थी। इस प्लांट से हर साल 500 मिलीलीटर की लगभग डेढ़ लाख से अधिक बोतल का उत्पादन होगा। एक बोतल में लगभग 40,000 पीपीएम नाइट्रोजन की मात्रा रहेगी जो लगभग 1 बोरी यूरिया के बराबर होगा। करोल प्लांट में नैनो यूरिया के उत्पादन से देश में फसलों के सीजन में खाद की किल्लत को दूर होने की संभावना है। नैनो यूरिया का पूरे देश में 90 से अधिक फसलों पर परीक्षण किया गया था। जानकारों का मानना है कि नैनो यूरिया के बाजार में पारंपरिक होने के बाद सामान्य यूरिया की खपत आधी से भी कम होने की संभावना है।

नैनो तकनीक का यूरिया
भारत में फसल की बुवाई से लेकर फसल कटाई के बीच का समय बेहद जरूरी माना जाता है। क्योंकि इस बीच कीड़ों और बीमारियों से फसलों की निगरानी और फसलों को पोषण प्रदान करने का काम किया जाता है। पोषण प्रबंधन का सीधा असर फसल की क्वालिटी पर पड़ता है, इसलिये किसान इस काम के लिये पोषक तत्वों और खनिज पदार्थों इस्तेमाल करते हैं। हाल ही में फसलों को पोषण प्रदान करने की नई तकनीक इजाद की गई है, जिसका नाम है नैनो यूरिया। नैनो यूरिया का इस्तेमाल फसलों की क्वालिटी को बढ़ाने में किया जा रहा है। इसके प्रयोग से मिट्टी का प्रदूषण स्तर भी काफी कम हद हो जाता है।

  • जाहिर है कि पारंपरिक खेती के समय फसलों पर डाला जाने वाला यूरिया बड़ी-बड़ी बोरियों में भरकर आता था। जिसे खेतों तक पहुंचाने और इसके छिड़काव में किसानों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ती थी। लेकिन आज नैनो टैक्नोलॉजी के दौर में एक बोरी यूरिया किसानों को सिर्फ एक बोतल मिल जाता है। 500 मिली. नैनो यूरिया की बोतल सिर्फ 250 रुपये की कीमत में किसानों को उपलब्ध कराई जा रही है। जो फसलों को आम यूरिया से ज्यादा पोषण प्रदान करती है।
  • यही कारण है कि नैनो यूरिया को कम लागत में अधिक पैदावार देने का साधन भी कहा जाता है। किसानों के लिये नैनो यूरिया का इस्तेमाल बेहद आसान है। फसलों पर छिड़काव के लिये 2-4 मिली. नैनो यूरिया लिक्विड़ को प्रति लीटर पानी में घोलकर स्प्रेयर की मदद से फसलों पर छिड़का जाता है। नैनो यूरिया के छिड़काव से फसल और मिट्टी की सेहत में सुधार होता ही है, साथ ही, ये जमीन में पानी की क्वालिटी को भी बेहतर बनाता है।
  • विशेषज्ञों की मानें तो इकोफ्रेंडली प्रॉडक्ट होने के कारण फसलों पर नैनो यूरिया छिड़कने से ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में काफी मदद मिलती है। कृषि वैज्ञानिकों की रिसर्च के मुताबिक नैनो यूरिया को 94 से ज्यादा फसलों पर छिड़का जा सकता है। नैनो यूरिया का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके इस्तेमाल से फसल की पैदावार में करीब 8 प्रतिशत तक बढोत्तरी देखी जा रही है। देश के लाखों किसानों के लिये नैनो यूरिया एक बेहद किफायती और मुनाफेदार खेती का साधन बनता जा रहा है।

छिड़काव और ढुलाई में आसानी
किसान अक्सर फसलों के वृद्धि और उनमें नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए यूरिया का इस्तेमाल करते हैं। बाजार में वर्तमान में उपलब्ध यूरिया ठोस रूप में उपलब्ध है जो बंद बोरी में आता है। किसान को बाजार से खेत तक तक इसकी ढुलाई में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। उसके बाद उसे खेतों में डालने में भी काफी दिक्कतें होती है। नैनो यूरिया लिक्विड फॉर्म में उपलब्ध है। इसे आसानी से पानी के साथ मिलाकर खेत में छिड़काव किया जा सकता है। इसके साथ ही इसे मशीन और ड्रोन के माध्यम से भी खेतों में छिड़क सकते हैं।
कैसे करेगा काम 2-4 मिलीमीटर नैनो यूरिया लिक्विड को एक लीटर पानी में मिलाकर एक फसल में दो बार छिड़काव करना है। जब नैनो यूरिया का छिड़काव पत्तियों पर होगा तो उसमें मौजूद नाइट्रोजन को पत्तियां सोख लेंगी जिसके कारण माना जा रहा है कि यह अभी बाजार में मौजूद यूरिया से अधिक फायदेमंद है। इसके साथ ही यह बाजार में अभी उपलब्ध यूरिया से सस्ती भी होगी। अभी 50 किलो के यूरिया के पैकेट का दाम लगभग 270 रुपये है जबकि 500 मिलीलीटर नेनौ यूरिया की बोतल 250 रुपये में उपलब्ध हो जाएगी।

नैनो यूरिया 1 एकड़ में - कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, फसल की ग्रोथ के लिए नैनों यूरिया का छिड़काव होता है, प्रति एकड़ 500 एमएल की बोतल में दो बार छिड़काव हो जाता है।

किसान इस कीमत में यहां खरीद सकेंगे- 500 मिली लीटर नैनो यूरिया तरल की बोतल 250 रुपए में किसानों को बिक्री की जाएगी।

नैनो यूरिया का प्रयोग करें- गेहूं की फसल में नैनो यूरिया का 4 एमएल प्रति लीटर पानी के घोल का खड़ी फसल में छिड़काव करना चाहिए। यानी एक पंप में लगभग 30 एमएल, इस हिसाब से एक एकड़ में 10 पंप लगते है तो 300 एमएल मात्रा लगेगी। इस तरह 500 एमएल की बोतल से दो बार छिड़काव हो जाएगा।

नैनो यूरिया तरल का कण आकार है- इफको नैनो यूरिया के एक कण का आकार लगभग 30 नैनोमीटर होता है। सामान्य यूरिया की तुलना में इसका पृष्ठ क्षेत्र और आयतन अनुपात लगभग 10,000 गुना अधिक होता है। यही नहीं, नैनो यूरिया (तरल) के उपयोग से उपज, बायोमास, मृदा स्वास्थ्य और उपज की पोषण गुणवत्ता में भी सुधार होता है।

नैनो यूरिया की विशेषताएं
  • ठोस यूरिया के मुकाबले नैनो यूरिया कम कीमत पर मिलती है।
  • यह तरल यूरिया पौधों के पोषण के लिए काफी प्रभावी और असरदार है।
  • इसका परिवहन न और भंडारण कम खर्च होता है।
  • इससे फसलों की गुणवत्ता में सुधार होता है।
  • नैनो यूरिया भूमिगत जल की गुणवत्ता सुधारने में मदद करती है।
  • ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में अहम भूमिका निभाती है।