राजकुमारी पीएच.डी कीटविज्ञान विभाग
डॉ. आर.एन.गांगुली प्राध्यापक कीटविज्ञान विभाग
भागवत साहू एम.एस.सी. पादप कार्यिकी

जैसा कि हम जानते हैं। गन्ना भारत की एक महत्वपूर्ण वाणिज्यिक फसल है पूरे भारतवर्ष में केवल गन्ने से चीनी निर्मित की जाती है। क्षेत्रफल की दृष्टि से गन्ने के उत्पादन में भारत का प्रथम स्थान है। परंतु चीनी उत्पादन में ब्राजील पहले स्थान पर व भारत दूसरे स्थान पर है। गन्ने को खाने के अलावा इस के जूस से गुड़ शक्कर और शराब आदि चीजों को बनाया जाता है। रस निकालने के बाद बचे हुए अवशेष का पशुओं के चारों के रूप में या कंपोस्ट बनाकर उपयोग किया जा सकता है। गन्ना एक नकदी फसल है। जिस की खेती प्रतिवर्ष लगभग 30 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में की जाती है।

आज के आधुनिक समय में भी गन्ने को परंपरागत तरीके से उगाते है। किसानों को अधिक लागत व उपज के लिए उन्नतशील किस्मों एवं वैज्ञानिक तरीकों से गन्ने की खेती करना आवश्यक है। वर्तमान समय में गन्ने की उच्च गुणवत्ता वाली उन्नत किस्मों को बाजारों में आसानी से देखा जा सकता है। जिसे उगाकर किसान भाई बहन अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

गन्ने लगाने की विधियां
गन्ने फसल को उगाने के लिए विभिन्न पद्धतियों को अपनाया जा सकता है। जिसमें रतून कलिका गन्नेे का सेट का उपयोग किया जाता है। जो कि गन्ने के परंपरागत तरीके से बिल्कुल अलग है। गन्ना उगाने के विधियों की भिन्नता बुवाई के समय प्रयुक्त की गई बिजाई समग्री तथा बुवाई हेतु उपयोग की जाने वाली भू कार्य पर निर्भर करती है। देसी हलो या ट्रैक्टर द्वारा बनाए गए गुणों में 40 से 60 हजार की दो या तीन आंख वाले गन्ने के टुकड़ों को डालना हमारे भारत देश की सबसे आसान व सबसे अधिक प्रचलित विधि है। हालांकि इस विधि में काफी मात्रा में गन्नेे की बीज की आवश्यकता पड़ती है। अतः एक आंख वाले टुकड़ों की पौध की रोपाई करके गन्ने की खेती में बीज गन्ना की मात्रा में भारी कमी करने का तरीका विकसित किया गया है।

इस नई विधि में गन्ने की पौध को पॉलीथिन के थैलों में उगाई जाती है। जिसमें खेत के क्यारियों की मिट्टी बालू व जीवांश खाद के मिश्रण भरे होते हैं। पॉलीथिन थैलों में गन्ने के एक आंख वाले टुकड़ों को जमा कर तथा उचित अवस्था पर उन्हें मुख्य खेत में रोपाई करके गन्ने की फसल उगाना पॉलीथिन तकनीक के अंतर्गत आता है।

पॉलीबैग तकनीक के लाभ
  • इस तकनीक में पौधों को उगाने के लिए कृषि योग्य भूमि की आवश्यकता नहीं पड़ती।
  • सामान्य विधि से बुवाई करने पर 30 से 35 प्रतिशत आंखें ही जमती है जबकि पॉलिथीन बैग से बुवाई करने पर 90 से 95 प्रतिशत आंखों का जमाव हो जाता है।
  • पॉलीबैग तकनीक से गन्ना उगाने पर प्रति हैक्टेयर केवल 1.5 से 2.0 टन बीज गन्ना की जरूरत पड़ती है। जिससे बीज की मात्रा में काफी बचत होती है। जबकि सामान्य विधि में 6 से 7 टन गन्ने के बीज लग जाते हैं।
  • बीज गन्ना व उत्पादित गन्ना की मात्रा के मध्य अनुपात काफी बढ़ जाता है। यह अनुपात सामान्य विधि में 1ः10 रहता है। जबकि पॉलीबैग विधि में यह अनुपात 1ः 40 तक पहुंच जाता है।
  • पौधों का समान वितरण व शुरुआती के कारण की कल्ले की संख्या व वजन दोनों बढ़ जाने के परिणाम स्वरूप संपूर्ण खेत में उपज की बढ़ोतरी होती है। शीघ्रता से एक साथ कल्ले निकलने के कारण पॉलीबैग विधि द्वारा उगाई फसल पिराई सत्र की शुरुआती दौर में चीनी का अधिक परता देती है।
  • पॉलीबैग तकनीक द्वारा उगाई गई गन्ने की फसल में पौधे प्रायः कम गिरते हैं।

प्रतिकूल परिस्थितियों में पॉलिथीन बैग तकनीक का उपयोग सफलतापूर्वक किया जा सकता है। धान की कटाई के बाद गिले खेत में बिना करसन क्रिया के पौधे सीधे खेत में रोपे जा सकते हैं। इसी तरह गेहूं की कटाई के बाद गन्ने की बुवाई में देरी हो जाने पर पॉलीबैग उपज में होने वाले नुकसान को कम कर देते हैं। पौधों के समान वितरण के साथ न्यूनतम खाली स्थानों के कारण पॉलीबैग तकनीक से उगाई गई फसल की पेडी भी अधिक उपज देती है।

विधियां
मिट्टी के मिश्रण के साथ पॉलीबैग तैयार करना
सबसे पहले 10× 15 सेंटीमीटर आकार का पॉलिथीन बैग लेते हैं। जिसे मिट्टी रेत और एफ वाइ एम या फेस मिट्टी का मिश्रण बनाकर 1ः1ः1 के अनुपात में भर देते हैं। मिश्रण को भरने के पहले बैगों को कुछ स्थानों पर छेद कर दे जाता है ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए।

गन्ने के सेट की तैयारी
गन्ने का सेट तैयार करने के लिए बीज गन्ने को स्वस्थ गन्ने फसल से लिया जाना चाहिए बीच गन्ने को परिपक्व गन्ने के ऊपरी हिस्से से ली जाती है। और यदि बीज गन्ने को अपरिपक्व गन्ने से लिया गया हो तो पूरे गन्ने को बीज के रूप में उपयोग किया जा सकता है। एकल कलिका सेट हो विकास रिंग के ऊपर काटकर कली के नीचे आठ से 10 सेंटीमीटर इंटरनोड छोड़कर तैयार किया जाता है। 1 हेक्टेयर भूमि के लिए लगभग 25000 से 30000 सेट की आवश्यकता होती है।

सेट उपचार और रोपण
गन्ने के सेट 2 को 20 मिनट के लिए बविष्टिन के 0.2 प्रतिशत घोल में भिगोया जाता है और उसके बाद इन सेटो को मिट्टी के मिश्रण से पॉलीबैग में लंबवत ऊपरी सतह पर लगा दिय जाता है। सेट को पॉलीबैग में लगाते समय यह ध्यान जरूर देना चाहिए कि गन्ने सेट की कली मिट्टी की सतह के ठीक ऊपर रखा जाए उसके बाद पॉलीबैग को एक समतल जगह पर रख दिया जाता है और सूखे गन्ने के पत्तों को मल्च के रूप में प्रयोग किया जाता है। वह सुखी धीरे मिट्टी को मल्च के ऊपर हलके से छिड़क जाता है ताकि इसे हवा से उखड़ने से रोका जा सके। पॉलीबैग में रोज हजारा की मदद से आवश्यकतानुसार पानी दिया जाता है। पॉलीबैग में जल भराव नहीं होना चाहिए उचित प्रबंधन तकनीक अपनाने पर 95 प्रतिशत अंकुरण प्राप्त किया जा सकता है।

मुख्य खेत में सेटस की रोपाई
मुख्य खेत में सेटस की रोपाई के लिए अच्छी जताई और खरपतवार से खेतों को मुक्त रखा जाता है। तैयार खेत में सेट की रोपाई सावधानी से की जाती है। प्रोफाइल से पहले सेट को तेज धार वाले चाकू से पॉलीबैग से निकाला जाता है। जिसे कुदाल या फावड़े की मदद से कतार के भीतर 7 सेंटीमीटर की दूरी पर रोपाई की जाती है। और गपै फिलिंग के लिए 8 से 10 प्रतिशत सेट रखनी चाहिए व रोपण के बाद खेत में हल्की सिंचाई करती रहनी चाहिए अंततः गन्ने की एक सामान्य फसल उगाने के लिए अन्य सभी अनुशंसित कृषि क्रियाओं को अपनाया जाना चाहिए।