तरुण कुमार, समीर ताम्रकार एवं  विजय कुमार 
पुष्प विज्ञान एवं भू दृश्य वास्तुकला विभाग कृषि महाविद्यालय, 
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर (छ. ग.)

गेंदा भारत में सबसे अधिक उगाए जाने वाले फूलों में से एक है। इसका उपयोग मंदिरों में चढ़ाने, सजावट, मालाएँ बनाने, समारोहों में सजावट और व्यावसायिक फूल उत्पादन सहित कई कार्यों में किया जाता है। किसान और फूल उत्पादक इसे इसलिए भी पसंद करते हैं क्योंकि यह कम समय में फूल देना शुरू कर देता है और इससे अच्छी आमदनी होती है। लेकिन अच्छी उपज तभी मिलती है जब नर्सरी में पौध मजबूत और रोगमुक्त तैयार हो। नर्सरी को फसल की “पहली नींव” माना जाता है, इसलिए इसे सही तरीके से तैयार करना बहुत जरूरी है। सही स्थान का चयन, उपजाऊ और भुरभुरी मिट्टी, गुणवत्तापूर्ण बीज, उपयुक्त बीज दर और नियमित देखभाल—ये सभी बातें पौध को स्वस्थ और बढ़िया बनाने में मदद करती हैं। इस लेख में गेंदा नर्सरी की तैयारी के सभी ज़रूरी चरणों को सरल और स्पष्ट भाषा में समझाया गया है ताकि नए और अनुभवी दोनों प्रकार के किसान बेहतर पौध तैयार कर सकें।

1. नर्सरी स्थल का चयन
अच्छे अंकुर और स्वस्थ पौध पाने के लिए नर्सरी का सही स्थान चुनना बहुत जरूरी है। जगह ऐसी होनी चाहिए जहाँ भरपूर धूप आती हो, जमीन बराबर हो और पानी आसानी से निकल सके। मिट्टी दोमट या रेतीली-दोमट होना सबसे अच्छा रहता है। ऐसे स्थान से बचें जहाँ पहले रोग लगे हों या बहुत ज्यादा खरपतवार हों।

2. मिट्टी की तैयारी
स्वस्थ पौधों के लिए मिट्टी का भुरभुरा और उपजाऊ होना जरूरी है। मिट्टी को 2–3 बार जुताई या खुदाई करके बारीक बना लें। प्रति वर्ग मीटर 5–7 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद (FYM) डालें। भारी मिट्टी में 1–2 किलो रेत मिलाएँ ताकि जल-निकास सुधरे। अंत में 1 मी × 3 मी आकार के उठे हुए बेड तैयार करें।

3. बीज का चयन और बुवाई
अच्छी गुणवत्ता वाले बीज अच्छी नर्सरी की कुंजी हैं। ताज़ा, रोगमुक्त और विश्वसनीय स्रोत से खरीदे गए बीजों का उपयोग करें। बेड पर 0.5–1 सेमी गहरी छोटी-छोटी कतारें बनाएं। बीजों को पतला बोकर हल्की मिट्टी और खाद के मिश्रण से ढक दें। पानी रोज़ कन (छेददार डिब्बा) से छिड़कें।

बीज दर (Seed Rate):
अफ्रीकन गेंदा: 300–400 ग्राम/हेक्टेयर, फ्रेंच गेंदा: 250–300 ग्राम/हेक्टेयर, 1×3 मी नर्सरी बेड के लिए: बीजों का उपयोग करें।

4. सिंचाई और मल्चिंग
नर्सरी को हल्की लेकिन नियमित सिंचाई दें।पानी का जमाव बिल्कुल न होने दें।भारी धूप या बारिश से बचाने के लिए बेड पर पुआल/सूखी घास/शेड नेट लगाएं।4–6 दिन बाद अंकुरण होने पर मल्च हटा दें।

5. पौध प्रबंधन
अंकुर उत्पत्ति के बाद पौधों की सही देखभाल बहुत जरूरी है। बेड को हमेशा खरपतवार-मुक्त रखें। यदि डैम्पिंग-ऑफ रोग दिखाई दे तो 0.2% कार्बेन्डाजिम का हल्का छिड़काव या ड्रेंचिंग करें। तेज गर्मी के दिनों में 50% शेड नेट का उपयोग करें। पौधों को मुख्य खेत की धूप और हवा के अनुकूल बनाने के लिए रोपाई से 7 दिन पहले धीरे-धीरे पूर्ण धूप में रखें (हार्डनिंग)। जब पौध लगभग 20 दिन के हो जाएँ, तब NPK (19:19:19) का 0.5 मिली/लीटर की दर से स्प्रे करें ताकि पौधों में बेहतर पोषण और वृद्धि सुनिश्चित हो सके।

6. पौध की आयु और रोपाई
गेंदा की पौध 25–30 दिन में रोपाई के लिए तैयार हो जाती है। पौध रोपाई के लिए तभी तैयार मानी जाती है जब उसमें 3–4 सच्ची पत्तियाँ, जड़ों की लंबाई 4–8 सेमी और पौधे की ऊँचाई 12–15 सेमी हो जाए।

रोपाई करते समय नर्सरी को एक दिन पहले अच्छी तरह पानी दें, पौधों को सावधानी से जड़ों सहित निकालकर मुख्य खेत में लगाएँ और दूरी अफ्रीकन गेंदा के लिए 45×45 सेमी तथा फ्रेंच गेंदा के लिए 30×30 सेमी रखें।

निष्कर्ष
अच्छी नर्सरी ही सफल गेंदा उत्पादन की आधारशिला है। सही स्थान चयन, मिट्टी की तैयारी, बीज उपचार, उचित सिंचाई और समय पर रोपाई से स्वास्थ्यवर्धक, समान और भरपूर फूल उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। उचित नर्सरी प्रबंधन न केवल पौध की गुणवत्ता बढ़ाता है बल्कि फसल की समग्र उपज में भी सुधार लाता है।

"उत्तम गुणवत्ता वाली पौध सामग्री से पौधों में पुष्पन क्षमता"