डॉ. संदीप तांडव (पीएचडी) वानिकी विभाग
डॉ. ज्योति सिन्हा (पीएचडी) वानिकी विभाग
डॉ. प्रताप टोप्पो (सहायक प्राध्यापक) वानिकी विभाग 
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर (छ.ग.)

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ बड़ी आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती और वानिकी पर निर्भर है। वर्तमान समय में बढ़ती ऊर्जा लागत, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की चुनौती को देखते हुए सौर ऊर्जा एक प्रभावी और टिकाऊ समाधान के रूप में उभर कर सामने आई है। सूरज की असीम ऊर्जा का उपयोग खेती और वानिकी दोनों क्षेत्रों में किसानों और वन-आश्रित समुदायों के लिए खुशहाली का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

भारत की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि और वानिकी है। देश की बड़ी जनसंख्या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती, वानिकी और इससे जुड़े कार्यों पर निर्भर है। परंतु आज किसानों और वन-आश्रित समुदायों के सामने अनेक चुनौतियाँ हैं, जैसे—बढ़ती ऊर्जा लागत, डीज़ल की महँगाई, अनियमित बिजली आपूर्ति, जलवायु परिवर्तन, तथा पर्यावरणीय असंतुलन। इन समस्याओं के समाधान के रूप में सोलर पैनल आधारित सौर ऊर्जा प्रणाली एक प्रभावी, स्वच्छ और टिकाऊ विकल्प के रूप में उभर कर सामने आई है।

सोलर पैनल सूरज की असीम ऊर्जा को उपयोगी बिजली में परिवर्तित कर खेती और वानिकी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय खुशहाली का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।

सोलर पैनल का अर्थ एवं कार्य प्रणाली
सोलर पैनल एक ऐसी तकनीक है जो सूर्य की किरणों को अवशोषित कर फोटोवोल्टिक सेल की सहायता से विद्युत ऊर्जा में बदलती है। यह प्रणाली पूरी तरह प्राकृतिक, नवीकरणीय और प्रदूषण-मुक्त होती है। सोलर पैनल से उत्पन्न बिजली को सीधे उपयोग में लाया जा सकता है या बैटरी में संग्रहित कर भविष्य के लिए सुरक्षित किया जा सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ बिजली की आपूर्ति अनियमित या अनुपलब्ध होती है, वहाँ सोलर पैनल किसानों के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन रहे हैं।

खेती में सोलर पैनल लगाने से लाभ

1. सिंचाई व्यवस्था में सुधार
खेती में सोलर पैनल का सबसे व्यापक उपयोग सोलर सिंचाई पंप के रूप में किया जा रहा है। डीज़ल या विद्युत चालित पंपों की तुलना में सोलर पंप—
  • ईंधन पर निर्भरता समाप्त करते हैं
  • संचालन लागत को अत्यंत कम कर देते हैं
  • बिजली कटौती की समस्या से मुक्ति दिलाते हैं

समय पर और पर्याप्त सिंचाई मिलने से फसल उत्पादन में वृद्धि होती है, जिससे किसानों की आय में सीधा लाभ होता है।

2. उत्पादन लागत में कमी
डीज़ल, पेट्रोल और बिजली की बढ़ती कीमतें खेती को महँगा बना रही हैं। सोलर पैनल लगाने से—
  • ईंधन पर होने वाला खर्च समाप्त हो जाता है
  • लंबे समय तक मुफ्त बिजली उपलब्ध होती है रखरखाव लागत भी न्यूनतम होती है

इससे किसानों की कुल उत्पादन लागत घटती है और शुद्ध लाभ बढ़ता है।

3. कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा
सोलर पैनल से प्राप्त बिजली का उपयोग विभिन्न कृषि यंत्रों जैसे—
  • स्प्रे मशीन, थ्रेशर, फीड कटर, प्रसंस्करण इकाइयों को चलाने में किया जा सकता है। इससे श्रम पर निर्भरता कम होती है और कार्यक्षमता बढ़ती है।

फसल प्रसंस्करण और भंडारण में सोलर पैनल की भूमिका
फसल कटाई के बाद होने वाला नुकसान किसानों के लिए एक बड़ी समस्या है। सोलर पैनल आधारित तकनीक—
  • सोलर ड्रायर, कोल्ड स्टोरेज, अनाज भंडारण इकाइयाँ के माध्यम से इस नुकसान को कम करती है।

सोलर ड्रायर से अनाज, फल और सब्जियों को सुरक्षित रूप से सुखाया जा सकता है, जिससे उनकी गुणवत्ता बनी रहती है और बाजार मूल्य बढ़ता है।

वानिकी क्षेत्र में सोलर पैनल के लाभ

1. गैर-काष्ठ वन उत्पादों (NTFPs) का प्रसंस्करण
वानिकी क्षेत्र में महुआ, इमली, हर्रा, बहेड़ा, आंवला, साल बीज, चिरौंजी जैसे NTFPs का महत्वपूर्ण योगदान है। सोलर पैनल आधारित ड्रायर और प्रसंस्करण इकाइयों से—
  • उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार होता है
  • संग्रहण अवधि बढ़ती है
  • बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होता है

2. महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को रोजगार
वन आधारित क्षेत्रों में महिलाएँ NTFP संग्रहण और प्रसंस्करण में प्रमुख भूमिका निभाती हैं। सोलर पैनल आधारित लघु उद्योग—
  • महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार प्रदान करते हैं
  • उनकी आय और आत्मनिर्भरता बढ़ाते हैं
  • ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन देते हैं

3. वन नर्सरी और पौधशालाओं में उपयोग
वन विभाग और ग्रामीण समुदायों द्वारा संचालित नर्सरी में सोलर पैनल—
  • सिंचाई
  • प्रकाश व्यवस्था
  • सुरक्षा-उपकरण
को ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे पौध उत्पादन में वृद्धि होती है।

कृषि-वानिकी (Agroforestry) और सोलर पैनल
कृषि-वानिकी प्रणाली में सोलर पैनल का समावेश एक नवीन अवधारणा है, जिसे एग्री-वोल्टाइक सिस्टम भी कहा जाता है। इसमें—
  • खेतों में फसलों के साथ , वृक्षों के बीच सोलर पैनल स्थापित किए जाते हैं

इससे भूमि का बहुउद्देशीय उपयोग होता है और किसान को -
  • फसल उत्पादन
  • वानिकी उत्पाद
  • सौर ऊर्जा तीनों से आय प्राप्त होती है। यह प्रणाली जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी सहायक है।

सोलर पैनल लगाने से—
  • लंबे समय तक बिजली बिल शून्य के बराबर हो जाता है
  • अतिरिक्त बिजली को ग्रिड से जोड़कर आय प्राप्त की जा सकती है
  • सरकारी सब्सिडी और योजनाओं से प्रारंभिक लागत कम होती है

इस प्रकार सोलर पैनल किसानों के लिए दीर्घकालीन आर्थिक निवेश सिद्ध होता है।

पर्यावरणीय लाभ
सोलर पैनल—
  • कार्बन उत्सर्जन को कम करते हैं
  • जीवाश्म ईंधन के उपयोग को घटाते हैं
  • जलवायु परिवर्तन से निपटने में सहायक हैं

खेती और वानिकी में सौर ऊर्जा का उपयोग पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देता है।

सामाजिक लाभ
सोलर पैनल से—
  • ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ती है
  • रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं
  • किसानों और वन-आश्रित समुदायों का जीवन स्तर सुधरता है

यह तकनीक ग्रामीण विकास और सामाजिक सशक्तिकरण का प्रभावी साधन बन रही है।


सरकारी योजनाएँ और समर्थन
भारत सरकार द्वारा सोलर पैनल को बढ़ावा देने हेतु—
  • सोलर पंप सब्सिडी
  • सौर सुजला योजना
  • पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना

जैसी योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जिससे किसानों को आर्थिक सहायता प्राप्त होती है।

घरों के लिए मुफ्त बिजली: पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना
यह योजना सब्सिडी वाले छत पर सौर पैनल स्थापित करके घरों को मुफ्त बिजली प्रदान करती है, जिससे उनकी ऊर्जा लागत में काफी कमी आती है।

सब्सिडी विवरण - इस योजना के तहत सरकार द्वारा घर की औसत मासिक बिजली खपत और संबंधित उपयुक्‍त घर की छत पर सौर संयंत्र की क्षमता के आधार पर सब्सिडी प्रदान की जाती है:

औसत मासिक बिजली खपत (यूनिट)

उपयुक्त छत सौर संयंत्र क्षमता

सब्सिडी सहायता

0-150

1-2 किलोवॉट

30,000 से 60,000 रुपये तक

150-300

2-3 किलोवॉट

60,000 से 78,000 रुपये तक

300 से अधिक

किलोवॉट से अधिक

78,000 रुपये

छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने को और अधिक किफायती बनाने के लिए, केंद्र सरकार 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी दे रही है। जबकि छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में 30 हजार रूपए तक की अतिरिक्त सब्सिडी की घोषणा की है।